महूर्त निकालने का तरीका शुभ मुहूर्त का महत्व - Best Astrologer Sahu Ji in Indore Madhya Pradesh

महूर्त निकालने का तरीका: शुभ महूर्त का महत्व

शुभ महूर्त क्या होता है?

शुभ महूर्त वह विशेष समय होता है जब किसी कार्य को आरंभ करने के लिए ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति सबसे अनुकूल होती है। यह समय किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार, शुभ महूर्त में किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है। यह अवधारणा विशेष रूप से विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है। शुभ महूर्त का सही चुनाव करने से नकारात्मक प्रभावों को कम किया जा सकता है और सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

शुभ मुहूर्त कैसे निकालते हैं?

शुभ महूर्त निकालने के लिए विभिन्न ज्योतिषीय गणनाएँ की जाती हैं। यहाँ पर मुख्य रूप से जिन कारकों को ध्यान में रखा जाता है, वे हैं:

  • पंचांग का अध्ययन: पंचांग भारतीय ज्योतिष का एक प्रमुख उपकरण है जिसमें पाँच मुख्य तत्त्व होते हैं: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण।
    • तिथि: तिथि चंद्र मास का एक दिन होता है और यह 30 होती हैं। प्रत्येक तिथि का एक विशेष महत्व होता है। जैसे, अमावस्या और पूर्णिमा को विशेष तिथि माना जाता है।
    • वार: सप्ताह के सात दिन (रविवार से शनिवार) होते हैं और प्रत्येक दिन का अपना महत्व होता है। उदाहरण के लिए, गुरुवार को गुरु ग्रह का दिन माना जाता है और इसे धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है।
    • नक्षत्र: 27 नक्षत्र होते हैं और हर नक्षत्र का एक विशेष प्रभाव होता है। उदाहरण के लिए, पुष्य नक्षत्र को अत्यधिक शुभ माना जाता है।
    • योग: दो ग्रहों के योग से बनने वाले 27 योग होते हैं। इनका भी ध्यान रखा जाता है क्योंकि योग विशेष प्रकार की ऊर्जा को दर्शाते हैं।
    • करण: 11 करण होते हैं और ये तिथि के आधे हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। करण का भी विशेष महत्व होता है और शुभ कार्यों के लिए सही करण का चयन किया जाता है।
  • ग्रहों की स्थिति: ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का विश्लेषण किया जाता है ताकि यह पता चल सके कि कौन-से ग्रह अनुकूल स्थिति में हैं। ग्रहों की स्थिति से यह पता चलता है कि कार्य किस प्रकार से प्रभावित होगा। जैसे, अगर शुक्र ग्रह अनुकूल स्थिति में है, तो विवाह के लिए यह समय शुभ माना जाएगा।
  • लग्न: लग्न का मतलब है उस समय का उदयमान राशिफल। शुभ लग्न का चुनाव भी मुहूर्त निकालने में अहम भूमिका निभाता है। सही लग्न का चयन करने से कार्य में सफलता और सकारात्मकता बढ़ती है।
  • चंद्रमा की स्थिति: चंद्रमा किस राशि में स्थित है, इसका भी विशेष ध्यान रखा जाता है क्योंकि चंद्रमा की स्थिति व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक स्थिति को प्रभावित करती है। चंद्रमा की अनुकूल स्थिति कार्य की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होती है।
  • सूर्योदय और सूर्यास्त: दिन और रात के समय का सही निर्धारण कर सूर्य के उदय और अस्त के समय को भी ध्यान में रखा जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्य एक शुभ समय पर शुरू हो।

शुभ महूर्त क्यों महत्वपूर्ण है?

शुभ महूर्त के महत्व के पीछे कई कारण हैं:

  • कार्य की सफलता: ऐसा माना जाता है कि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य अधिक सफल होते हैं और उनके परिणाम शुभ होते हैं। यह समय सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है और कार्य की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
  • शांति और समृद्धि: शुभ मुहूर्त में कार्य करने से जीवन में शांति और समृद्धि आती है। इस समय में किए गए कार्य सकारात्मक परिणाम लाते हैं और जीवन में खुशहाली बढ़ती है।
  • अशुभ घटनाओं से बचाव: शुभ मुहूर्त में कार्य करने से संभावित अशुभ घटनाओं और समस्याओं से बचाव होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो।
  • संस्कृति और परंपरा: भारतीय संस्कृति और परंपराओं में शुभ मुहूर्त का विशेष स्थान है। यह धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं का पालन करते हुए कार्य करने की विधि है। शुभ मुहूर्त का पालन करके हम न केवल अपनी परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि भी लाते हैं।
  • मानसिक शांति: यह विश्वास कि कार्य शुभ समय में किया गया है, मानसिक शांति और संतोष प्रदान करता है। यह व्यक्ति को आत्मविश्वास और आशा से भर देता है, जिससे कार्य में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

शुभ महूर्त का चयन कैसे किया जाता है?

शुभ महूर्त का चयन करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

  • पंचांग का उपयोग: पंचांग में दिए गए तिथि, वार, नक्षत्र, योग, और करण का अध्ययन किया जाता है। यह सुनिश्चित किया जाता है कि ये सभी तत्व शुभ हों और कार्य के लिए अनुकूल हों।
  • ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण: ज्योतिषी ग्रहों की स्थिति का विश्लेषण करते हैं और यह सुनिश्चित करते हैं कि वे कार्य के लिए अनुकूल हों। यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रहों की स्थिति कार्य की सफलता को प्रभावित कर सकती है।
  • लग्न और चंद्रमा की स्थिति: सही लग्न और चंद्रमा की स्थिति का चयन करना महत्वपूर्ण होता है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्य सही समय पर शुरू हो और सकारात्मक परिणाम प्राप्त हों।
  • मुहूर्त का निर्धारण: उपरोक्त सभी कारकों का ध्यान रखते हुए, ज्योतिषी शुभ मुहूर्त का निर्धारण करते हैं। यह समय उस कार्य के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है और इसे पंचांग में देखा जा सकता है।

निष्कर्ष

शुभ महूर्त का चयन एक प्राचीन और महत्वपूर्ण ज्योतिषीय प्रक्रिया है जो किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए अनिवार्य मानी जाती है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्य अनुकूल समय में शुरू हो, जिससे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो। भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार शुभ मुहूर्त का पालन करके हम न केवल अपनी परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि भी लाते हैं। शुभ मुहूर्त का सही चयन करने से कार्य की सफलता की संभावना बढ़ जाती है और जीवन में शांति और समृद्धि बनी रहती है। इसलिए, किसी भी महत्वपूर्ण कार्य को शुरू करने से पहले शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक होता है।

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