बार-बार दुर्घटनाओं के कारण - Best Astrologer in Indore Madhya Pradesh

ज्योतिषीय दृष्टि से बार-बार दुर्घटनाओं के कारण

जीवन में दुर्घटनाएं कभी-कभी अचानक घटित हो जाती हैं और व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि का सामना करना पड़ता है। जब ऐसी घटनाएं बार-बार होने लगती हैं, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। ज्योतिष शास्त्र में, दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करके संभावित उपाय बताए जा सकते हैं। इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी साहू जी के अनुसार, ज्योतिषीय दृष्टि से कई ऐसे कारण हो सकते हैं जिनसे व्यक्ति के साथ बार-बार दुर्घटनाएं घटित होती हैं। आइए, जानते हैं इन ज्योतिषीय कारणों और उनके निवारण के उपायों के बारे में।

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मंगल ग्रह का प्रभाव

  • मंगल ग्रह को ज्योतिष में अग्नि, ऊर्जा और युद्ध का प्रतीक माना जाता है। यह ग्रह साहस, शक्ति और प्रतिस्पर्धा का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन यदि यह कुंडली में अशुभ स्थिति में हो, तो यह दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। मंगल का पंचम, अष्टम या द्वादश भाव में होना या अशुभ ग्रहों से दृष्ट होना दुर्घटनाओं की संभावनाएं बढ़ाता है। इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी साहू जी के अनुसार, मंगल ग्रह की शांति के लिए हनुमान जी की पूजा और मंगल मंत्र का जाप करना लाभकारी हो सकता है।

राहु और केतु का प्रभाव

  • राहु और केतु छाया ग्रह होते हैं और इन्हें अशुभ फलदायक माना जाता है। राहु का अष्टम भाव में स्थित होना या केतु का द्वादश भाव में होना दुर्घटनाओं की संभावनाएं बढ़ा सकता है। इन ग्रहों का प्रभाव जीवन में अचानक और अप्रत्याशित घटनाओं का कारण बनता है। मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार, राहु और केतु की शांति के लिए नियमित रूप से मंत्र जाप और दान करना लाभकारी होता है।

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शनि का प्रभाव

  • शनि ग्रह को ज्योतिष में धीमी गति, संघर्ष और कर्मफल का प्रतीक माना जाता है। यदि शनि ग्रह अशुभ स्थिति में हो या अष्टम भाव में हो, तो यह दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के समय भी व्यक्ति को दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि ग्रह की शांति के लिए शनिवार के दिन व्रत रखना, शनि मंत्र का जाप करना और शनि मंदिर में तेल चढ़ाना लाभकारी होता है।

अष्टम भाव का महत्व

  • अष्टम भाव को ज्योतिष में मृत्यु, दुर्घटना, और अप्रत्याशित घटनाओं का भाव माना जाता है। यदि इस भाव में अशुभ ग्रह स्थित हों या इस पर अशुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। हाल ही में हुए गणना के अनुसार, अष्टम भाव की शांति के लिए विशेष पूजा और हवन करना आवश्यक होता है।
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कालसर्प दोष

  • कालसर्प दोष तब बनता है जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच स्थित होते हैं। इस दोष से प्रभावित व्यक्ति को जीवन में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें दुर्घटनाएं भी शामिल हैं। भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार, कालसर्प दोष के निवारण के लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान करना आवश्यक होता है।

पितृ दोष

  • पितृ दोष का अर्थ है पूर्वजों की आत्माओं की अशांति। यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष हो, तो उसे दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है। पितृ दोष के निवारण के लिए श्राद्ध कर्म और पितृ तर्पण करने से लाभ मिल सकता है। भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी का मानना है कि पितृ दोष के निवारण के लिए अमावस्या के दिन विशेष पूजा करने से दुर्घटनाओं की संभावनाएं कम हो सकती हैं।

दुर्घटनाओं के ज्योतिषीय निवारण उपाय

हनुमान जी की पूजा

  • हनुमान जी को संकटमोचक कहा जाता है और उनकी पूजा करने से मंगल ग्रह की अशुभता कम होती है। हनुमान चालीसा का पाठ और हनुमान जी के मंदिर में नियमित रूप से दर्शन करना दुर्घटनाओं से बचाव में सहायक होता है।

महामृत्युंजय मंत्र का जाप

  • महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है। यह मंत्र विशेष रूप से अष्टम भाव और अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।

रत्न धारण

  • ग्रहों की शांति और शुभता के लिए व्यक्ति अपनी कुंडली के अनुसार रत्न धारण कर सकता है। जैसे कि मंगल के लिए मूंगा, शनि के लिए नीलम, और राहु-केतु के लिए गोमेद या लहसुनिया धारण करना लाभकारी होता है।

यज्ञ और हवन

  • विशेष यज्ञ और हवन का आयोजन करके ग्रहों की अशुभता को कम किया जा सकता है। इसमें नवग्रह शांति यज्ञ, कालसर्प दोष निवारण हवन, और महामृत्युंजय यज्ञ शामिल हैं।

दान और व्रत

  • शनिवार के दिन काले तिल, काले वस्त्र, और लोहे का दान करने से शनि की अशुभता कम होती है। इसी तरह, राहु-केतु के निवारण के लिए सर्प पूजा और राहु-केतु मंत्र का जाप करना लाभकारी होता है |

नियमित पूजा और ध्यान

  • नियमित रूप से पूजा और ध्यान करने से मन शांत रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे व्यक्ति को दुर्घटनाओं से बचने में सहायता मिलती है।

निष्कर्ष

ज्योतिषीय दृष्टि से दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करके उनकी रोकथाम के उपाय किए जा सकते हैं। भारत के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार, मंगल ग्रह, राहु-केतु, शनि, अष्टम भाव, कालसर्प दोष और पितृ दोष दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हो सकते हैं। वैदिक ज्योतिष के अनुसार के अनुसार, इन दोषों के निवारण के लिए हनुमान जी की पूजा, महा मृत्युंजय मंत्र का जाप, रत्न धारण, यज्ञ और हवन, दान और व्रत, और नियमित पूजा और ध्यान करना आवश्यक होता है। इन उपायों का पालन करके व्यक्ति दुर्घटनाओं से बच सकता है और सुरक्षित जीवन जी सकता है।

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