साढ़े साती के प्रभाव और उनसे बचने के उपाय - Best Astrologer Sahu Ji in Indore Madhya Pradesh

साढ़े साती के प्रभाव और उनसे बचने के उपाय

साढ़े साती क्या है?

इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार साढ़े साती (साढ़ेसाती) एक ज्योतिषीय अवधारणा है जिसे भारतीय ज्योतिष में शनि की दशा से संबंधित माना जाता है। यह अवस्था तब शुरू होती है जब शनि ग्रह चंद्र राशि से एक राशि पीछे, वर्तमान राशि और एक राशि आगे होते हैं। साढ़े साती का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह कुल मिलाकर सात साल और छह महीने (साढ़े सात साल) तक चलता है।

साढ़े साती के चरण

साढ़े साती को तीन चरणों में विभाजित किया जाता है:

  • पहला चरण: जब शनि ग्रह चंद्र राशि से एक राशि पीछे होता है।
  • दूसरा चरण: जब शनि ग्रह चंद्र राशि में होता है।
  • तीसरा चरण: जब शनि ग्रह चंद्र राशि से एक राशि आगे बढ़ता है।

साढ़े साती के लक्षण और प्रभाव

साढ़े साती के दौरान विभिन्न प्रकार के प्रभाव महसूस हो सकते हैं, जिनमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभाव शामिल हैं। यहां कुछ सामान्य लक्षण और प्रभाव दिए गए हैं:

  • शारीरिक प्रभाव: थकान, कमजोरी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, चोटें आदि।
  • मानसिक प्रभाव: तनाव, चिंता, अवसाद, मनोबल में कमी।
  • आर्थिक प्रभाव: आर्थिक हानि, निवेश में नुकसान, आय में कमी।
  • सामाजिक प्रभाव: संबंधों में तनाव, मित्रों और परिवार के साथ मनमुटाव, सामाजिक प्रतिष्ठा में गिरावट।

साढ़े साती से बचने के उपाय

साढ़े साती के प्रभावों से बचने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। इनमें से कुछ उपाय ज्योतिषीय हैं जबकि कुछ धार्मिक और आध्यात्मिक होते हैं।

  • शनि मंत्र का जाप: शनि देव को प्रसन्न करने के लिए “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप नियमित रूप से करें।
  • हनुमान चालीसा का पाठ: हनुमान जी की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ शनि देव के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।
  • काले तिल और सरसों का दान: शनिवार के दिन काले तिल और सरसों का दान करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।
  • पीपल के वृक्ष की पूजा: शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष की पूजा और उसके नीचे दीपक जलाने से शनि देव के प्रभाव में कमी आती है।
  • नीलम रत्न धारण: शनि की प्रतिकूलता को कम करने के लिए नीलम रत्न धारण किया जा सकता है, लेकिन इसे किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह पर ही धारण करना चाहिए।
  • शनिवार का व्रत: शनिवार का व्रत रखने से भी शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।

जीवनशैली में परिवर्तन

साढ़े साती के दौरान अपने जीवन में कुछ सकारात्मक परिवर्तन लाकर भी इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है:

  • सकारात्मक सोच: नकारात्मक विचारों से दूर रहें और सकारात्मक सोच विकसित करें।
  • धैर्य और संयम: साढ़े साती के दौरान धैर्य और संयम बनाए रखें।
  • योग और ध्यान: योग और ध्यान का अभ्यास करने से मानसिक तनाव कम होता है और मन शांत रहता है।
  • सादा जीवन: सादा और अनुशासित जीवन जीने की कोशिश करें।
  • सेवा और परोपकार: दूसरों की मदद करने और परोपकार के कार्यों में संलग्न रहें।

धार्मिक और आध्यात्मिक उपाय

धार्मिक और आध्यात्मिक उपाय भी साढ़े साती के प्रभाव को कम करने में सहायक होते हैं:

  • शनि मंदिर में पूजा: शनि मंदिर में जाकर नियमित रूप से पूजा करें।
  • शनि अष्टक का पाठ: शनि अष्टक का पाठ करें और शनि देव की आराधना करें।
  • ध्यान और प्रार्थना: नियमित रूप से ध्यान और प्रार्थना करें।

निष्कर्ष

साढ़े साती एक ज्योतिषीय अवस्था है जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ सकता है। हालांकि, इसके प्रभावों से डरने के बजाय सकारात्मक उपायों को अपनाकर इनसे निपटा जा सकता है। धार्मिक, आध्यात्मिक और व्यक्तिगत प्रयासों से साढ़े साती के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है और जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। इंदौर के प्रसिद्ध ज्योतिषी मनोज साहू जी के अनुसार साढ़े साती के दौरान धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समय भी गुज़र जाएगा और एक नया सकारात्मक अध्याय शुरू होगा।

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